Supreme court lawyers in delhi एक प्रॉपर्टी दो दावेदार और 40 साल मुकदमा, हेयर डाई ने कर दिया दूध का दूध और पानी का पानी, दिलचस्प है कहानी
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Supreme court lawyers in delhi आंध्र प्रदेश की एक बुजुर्ग महिला के इकलौते पोते को अपनी दादी की संपत्ति पर अपना हक पाने के लिए 4 दशक लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। उसकी पूरी जवानी कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने में खप गई। आखिरकार जीत उसकी हुई और बुजुर्ग महिला का ‘कथित तौर पर गोद लिया’ बेटा संपत्ति हड़पने में नाकाम हुआ। दिलचस्प बात ये है कि हेयर डाई ने इस केस का फैसला करने में बड़ी भूमिका निभाई। मुकदमेबाजी में युवक के 17 साल आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का चक्कर लगाते बीता जबकि 16 साल सुप्रीम कोर्ट में जूते घिसने में गुजर गए।

Supreme court lawyers in delhi उसी सुप्रीम कोर्ट में जो लगातार कहता है कि समय से न्याय जीवन के मूलभूत अधिकार का हिस्सा है। इस मामले में बुजुर्ग महिला की संपत्ति के दो-दो दावेदार थे। दोनों ने वसीयत के आधार पर दावेदारी की। एक महिला का इकलौता पोता तो दूसरा महिला का कथित तौर पर गोद लिया हुआ बेटा। ‘हक की बात’ (Haq Ki Baat) सीरीज के एक अंक में हमने वसीयत की अहमियत के बारे में विस्तार से बात की थी। लेकिन इस मामले में तो एक ही महिला के दो-दो कथित वसीयत थे।

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क्या है मामला

वेंकुबयम्मा नाम की बुजुर्ग महिला ने मई 1981 में वसीयत लिखकर ओडिशा के एक कस्बे में अपनी प्रॉपर्टी को अपने इकलौते पोते कालीप्रसाद के नाम कर दी। फरवरी 1982 में महिला ने अपने पोते की शादी कर दी। इसके 5 महीने बाद ही जुलाई 1982 में महिला की मौत हो गई Supreme court lawyers in delhi।

वेंकुयम्मा की मौत के बाद अचानक एक शख्स सीन में आया और महिला की संपत्ति पर दावेदारी का मामला कोर्ट पहुंच गया। शख्स ने दावा किया कि वह उसका गोद लिया हुआ बेटा है। इतना ही नहीं, उसने दावा किया कि महिला ने संपत्ति की वसीयत भी उसके नाम कर दी थी और पोते के नाम की गई वसीयत को रद्द कर दिया था। शख्स ने अप्रैल 1982 में गोद लिए जाने और मई 1982 में वसीयत के दस्तावेज भी पेश किए।

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ट्रायल कोर्ट ने पोते के खिलाफ दिया फैसला, हाई कोर्ट ने पलटा

Supreme court lawyers in delhi ट्रायल कोर्ट ने 1989 में महिला के कथित तौर पर गोद लिए गए ‘बेटे’ के पक्ष में फैसला सुनाया। कालीप्रसाद ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी। 2006 में हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए महिला के पोते के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद जनवरी 2008 में ‘गोद लिए गए बेटे’ ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। 2010 में शीर्ष अदालत ने अपील को स्वीकर कर लिया।

हेयर डाई ने कर दिया दूध का दूध और पानी का पानी

Supreme court lawyers in delhi सुप्रीम कोर्ट में ‘गोद लिए गए बेटे’ ने 18 अप्रैल 1982 में हुई कथित अडॉप्शन सेरेमनी की तस्वीरें पेश की, जिसमें 70 साल की बुजुर्ग महिला महिला के बाल काले दिख रहे थे।

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जस्टिस सीटी रविकुमार और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने सवाल किया कि क्या 1982 में किसी सुदूर इलाके में रह रही महिला बालों को डाई करती होगी। इस सवाल के बाद कथित तौर पर गोद लिए बेटे के फर्जीवाड़े की कलई एक-एक करके खुलने लगी। उसने महिला के पोते को संपत्ति पर वैध उत्तराधिकार से वंचित करने और खुद हड़पने के लिए फर्जीवाड़े का खेल रचा था।Supreme court lawyers in delhi

हेयर डाई से उठे सवाल और परत दर परत खुल गया झूठ

Supreme court lawyers in delhi सुप्रीम कोर्ट को दूसरा संदेह इस पर हुआ कि ‘गोद लिया हुआ बेटा’ यह समझाने में नाकाम रहा कि मई 1981 और अप्रैल 1982 के दौरान आखिर ऐसा क्या हुआ जो बुजुर्ग महिला और उसके पोते के संबंध कथित तौर पर बिगड़ गए। इतने बिगड़ गए कि महिला ने उसे अपनी संपत्ति से कथित तौर पर बेदखल कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर शक जताया कि कथित अडॉप्शन सेरेमनी में प्रफेशनल फटॉग्रफर बुलाया गया था लेकिन उसने सिर्फ 3 ही तस्वीरें क्यों लीं?

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अडॉप्शन डीड की विश्वसनीयता पर शक जताते हुए जस्टिस संजय कुमार ने कहा कि जिस तरह से कथित अडॉप्शन हुआ उससे उठे संदेहों को दूर नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि वेंकुबयम्मा और कालीप्रसाद के रिश्तों में कथित खटास को साबित करने के लिए भी कोई सबूत नहीं पेश किया गया। Supreme court lawyers in delhi इसके अलावा डॉक्युमेंट ये समझा पाने में भी नाकाम हैं कि वेंकुबयम्मा आखिर कालीप्रसाद से नाराज क्यों हुई जबकि कुछ महीने पहले ही उन्होंने फरवरी 1982 में अपने पोते की शादी की थी।

और 40 साल बाद मिला इंसाफ

बेंच ने आगे कहा, ‘सिर्फ उनके बालों के रंग से ही सवाल खड़ा नहीं होता। उसके आधार पर बस संदेह पैदा होता है। तस्वीर में महिला की उम्र से भी शक पैदा होता है।’ आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने ‘गोद लिए गए बेटे’ की अपील खारिज कर दी और पोते को उसका वाजिब हक देकर 4 दशकों तक कछुए की चाल से चले मुकदमे का फैसला किया।Supreme court lawyers in delhi

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